शिव कृपा एवं मंगलकामना संकल्प
आपके परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना की जाएगी।
पार्थिवेश्वर पूजन का शास्त्रीय आधार महापूजन का विशेष महत्व
१. शिवपुराण
शिवपुराण में भगवान शिव स्वयं पार्थिव लिङ्ग पूजन की महिमा बताते हैं—
पार्थिवं लिङ्गमादाय यः पूजयति शङ्करम्।
तस्य सर्वाणि कार्याणि सिद्ध्यन्ति नात्र संशयः ॥
भावार्थ: जो भक्त पार्थिव (मिट्टी के) शिवलिङ्ग का निर्माण कर भगवान शंकर का पूजन करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
२. लिङ्गपुराण
गन्धपुष्पादिभिर्भक्त्या पार्थिवं यः प्रपूजयेत्।
अश्वमेधसहस्रस्य फलं प्राप्नोति मानवः ॥
भावार्थ: जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से पार्थिव लिङ्ग का पूजन करता है, वह सहस्र अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त करता है।
३. स्कन्दपुराण
न पार्थिवसमं लिङ्गं न पार्थिवसमं तपः ।
न पार्थिवसमं पुण्यं त्रैलोक्ये सचराचरे ॥
भावार्थ: तीनों लोकों में पार्थिव लिङ्ग के समान न कोई तप है, न कोई पुण्य है और न ही कोई अन्य श्रेष्ठ लिङ्ग।
४. शिवधर्म एवं आगम परम्परा
मृत्तिकालिङ्गनिर्माणं शिवपूजां करोति यः ।
जन्मकोटिकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति ॥
भावार्थ: जो व्यक्ति मिट्टी का शिवलिङ्ग बनाकर शिवपूजन करता है, उसके करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
महापूजन का विशेष महत्व
पार्थिवेश्वर पूजन के विशेष लाभ (शास्त्रानुसार)
मनोकामना-सिद्धि
सर्वकामप्रदं लिङ्गं पार्थिवं परिकीर्तितम्।
भावार्थ: पार्थिव लिङ्ग सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला कहा गया है।
रोग-निवारण
आरोग्यं भास्करादिच्छेत् धनमिच्छेत् हुताशनात्।
ज्ञानं महेश्वरादिच्छेत् मोक्षमिच्छेज्जनार्दनात्॥
भावार्थ: यद्यपि यह श्लोक सामान्य देवोपासना के फल का वर्णन करता है, परंतु शिवपूजन को ज्ञान, शांति एवं कल्याण का प्रमुख साधन माना गया है।
ग्रहदोष शान्ति
कर्मकाण्ड ग्रन्थों में पार्थिवेश्वर पूजन को विशेषतः निम्न हेतु अनुशंसित किया गया है—
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग की नगरी अवन्तिका में प्राचीन काल से पार्थिव शिवलिङ्ग पूजन की परम्परा चली आ रही है। श्रावण मास, महाशिवरात्रि, नागपञ्चमी, प्रदोष एवं विशेष कामना-सिद्धि अनुष्ठानों में पार्थिवेश्वर पूजन को अत्यन्त प्रभावशाली माना जाता है।
समापन श्लोक
देवदेव महादेव त्राहि मां शरणागतम्।
जन्ममृत्युजराव्याधिपीडितं कर्मबन्धनैः॥
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्॥
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥
पार्थिवेश्वर पूजन के विशेष लाभ
आध्यात्मिक लाभ
कर्मकाण्ड परम्परा में पार्थिवेश्वर पूजन को निम्न दोषों की शान्ति हेतु भी कराया जाता है—
गौसेवा का शास्त्रीय महत्व
सनातन धर्म में गौ को केवल पशु नहीं, बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्रदायिनी माना गया है। वेद, पुराण और स्मृतियों में गौसेवा को महापुण्यकारी बताया गया है।
शास्त्रवचन
गावो विश्वस्य मातरः॥
(ऋग्वैदिक परंपरा में प्रसिद्ध उक्ति)
भावार्थ: गौ सम्पूर्ण विश्व की माता है।
मातरः सर्वभूतानां गावः सर्वसुखप्रदाः।
वृद्धिमाकाङ्क्षता नित्यं गावः कार्याः प्रदक्षिणाः॥
भावार्थ: गौ सभी प्राणियों की माता एवं सुख प्रदान करने वाली है। जो उन्नति चाहता है, उसे नित्य गौ का सम्मान करना चाहिए।
महाभारत में गौमहिमा
गावः प्रतिष्ठा भूतानां गावः स्वस्त्ययनं महत्।
गावः पवित्रं परमं गावो मङ्गलमुत्तमम्॥
भावार्थ: गौ समस्त प्राणियों की आधारशिला है। गौ परम पवित्र और सर्वोत्तम मंगल का स्रोत है।
स्कन्दपुराण
यत्र गावः पूज्यन्ते तत्र तिष्ठन्ति देवताः।
भावार्थ: जहाँ गौ का सम्मान और सेवा होती है, वहाँ देवताओं का निवास होता है।
गौसेवा के आध्यात्मिक लाभ
पापक्षय
गोसेवा गोदानं च सर्वपापप्रणाशनम्।
गौसेवा को अनेक पुराणों में पापों के क्षय का साधन कहा गया है।
ग्रहशांति
वैदिक ज्योतिष परंपरा में गौसेवा को विशेषतः सूर्य, चन्द्र, गुरु, राहु एवं केतु जनित कष्टों की शांति हेतु लाभकारी माना गया है।
पितृकृपा
अमावस्या, श्राद्ध एवं पितृकर्म में गौसेवा का विशेष महत्व माना गया है।
धन एवं समृद्धि
गावः लक्ष्म्याः सदनं स्मृतम्।
भावार्थ: गौ को लक्ष्मी का निवास स्थान माना गया है।
आरोग्य एवं कल्याण
गौमाता से प्राप्त पंचगव्य एवं गौ-आधारित जीवनशैली को आयुर्वेद में स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है।
आपके महाअनुष्ठान हेतु विशेष घोषणा
"२,५१,००० पार्थिव शिवलिङ्ग महापूजनम् में प्राप्त प्रत्येक दानराशि का एक भाग गौसेवा एवं गोसंरक्षण हेतु समर्पित किया जाएगा।"
"इस प्रकार यजमान को एक साथ शिवपूजन, तीर्थपूजन एवं गौसेवा—तीनों महापुण्यों का लाभ प्राप्त होगा।"
प्रचार सामग्री हेतु संक्षिप्त पंक्तियाँ
"२,५१,००० पार्थिव शिवलिङ्ग महापूजनम् में आपका अंशदान केवल एक धार्मिक सहभागिता नहीं, बल्कि शिवभक्ति, गौसंरक्षण एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण का पावन संकल्प है।"
या यह श्लोक भी अंत में दिया जा सकता है—
गावः सुरभयो नित्यं गावो गुग्गुलुगन्धिकाः।
गावः प्रतिष्ठा भूतानां गावः स्वस्त्ययनं महत्॥
भावार्थ: गौएँ सदा कल्याणकारी हैं, समस्त प्राणियों की आधार हैं और महान मंगल प्रदान करती हैं।
आपके परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना की जाएगी।
ग्रहशान्ति, पितृ कृपा एवं जीवन की बाधाओं के निवारण हेतु विशेष वैदिक संकल्प।
समाज, राष्ट्र एवं संपूर्ण विश्व के मंगल एवं शांति हेतु सामूहिक प्रार्थना।
संकल्प एवं सहभागिता
शुद्धता एवं पवित्रता
धार्मिक आचरण
हर पूजन एक निश्चित पूजा विकल्प है जिसकी अपनी कीमत है। भाग लेते समय एक चुनें।
यह प्रारंभिक यजमान पूजन उन श्रद्धालुओं के लिए है जो अपने नाम-गोत्र संकल्प के साथ २,५१,००० पार्थिव शिवलिङ्ग महापूजनम् में सहभागी होकर भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं। यह सेवा स्वास्थ्य, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख एवं विघ्न-बाधा निवारण के लिए विशेष संकल्प सहित सम्पन्न की जाती है।
यह रजत यजमान पूजन अधिक विस्तृत वैदिक पंचोपचार, एकादश रुद्राभिषेक एवं वैदिक मंत्रोच्चार सहित सम्पन्न किया जाता है।
यह सुवर्ण यजमान पूजन षोडशोपचार, पंचामृत अभिषेक, सहस्रार्चन एवं संपुटित महामृत्युंजय पाठ सहित अधिक समृद्ध एवं व्यक्तिगत वैदिक अनुष्ठान प्रदान करता है।
यह मुख्य महा-यजमान पूजन उज्जैन महाकाल परंपरा से प्रेरित राजोपचार, विशिष्ट महाभिषेक, वैदिक एवं तांत्रिक अनुष्ठानों तथा दिव्य राजसी श्रृंगार सहित सम्पन्न किया जाता है।
पार्थिवेश्वर पूजन भगवान शिव के पार्थिव (मिट्टी से निर्मित) शिवलिङ्गों के निर्माण, अभिषेक, पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार सहित सम्पन्न होने वाला एक प्राचीन एवं शास्त्रसम्मत अनुष्ठान है। शिवपुराण, लिङ्गपुराण तथा अन्य ग्रंथों में इसकी महिमा का वर्णन मिलता है।
इस महाअनुष्ठान में २.५१ लाख पार्थिव शिवलिङ्गों का सामूहिक पूजन, रुद्रपाठ एवं रुद्राभिषेक सम्पन्न होता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार यह सर्वकामना-सिद्धि, ग्रहशान्ति, कुलकल्याण तथा शिवकृपा प्राप्ति का महायज्ञ माना जाता है।
हाँ। यदि आयोजन समिति द्वारा ऑनलाइन सहभागिता की सुविधा उपलब्ध कराई गई हो, तो भक्त घर बैठे संकल्प करा सकते हैं तथा पूजन के दिव्य फल एवं आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना से सहभागी बन सकते हैं।
कर्मकाण्ड परम्परा के अनुसार इस पूजन के माध्यम से मंगल दोष, कालसर्प दोष, पितृदोष, राहु-केतु जनित बाधाओं तथा शनि सम्बन्धी कष्टों की शान्ति हेतु प्रार्थना की जाती है।
विष्णु सागर उज्जैन के प्राचीन सप्तसागरों में से एक माना जाता है। महाकाल की पावन नगरी अवन्तिका में स्थित इस तीर्थ पर सम्पन्न पार्थिवेश्वर महापूजन को विशेष पुण्यदायक एवं आध्यात्मिक कल्याणकारी माना गया है।